नागपुर का संतरा – रफत आलम द्वारा

Khana toh Padega,MITRON !

एक खुला पत्र आप सबके समक्ष “नागपुर का संतरा” आज देश के हर हिस्से में नागपुर से संतरे भेजे जा रहे है ! और किसी फल को इतनी महत्त्वता नहीं दी जा रही जितनी इन संतरों को दी जा रही है! आपकी इच्छा हो या ना हो लेकिन आपको ये संतरा खाना पड़ेगा आपसे पूछा नहीं जा रहा की आप कौनसा फल खाना
चाहते हैं बल्कि आपको ज़बरदस्ती ये संतरा खिलाया जा रहा है! एक ज़बरदस्त तानाशाही का दौर है,अगर कोई तरबूज़ या लाल अनार या हरा अमरुद या कोई
अन्य फल खाना चाहे वो उसकी इच्छा है, आप कौन होते है उसे संतरा ख़िलाने वाले यदि में नागपुर के संतरों की जगह केरला का नारियल पानी ज़्यादा पसंद
करता हूँ तो ये मेरी आज़ादी है ! आप मुझे रोक नहीं सकते! एक जो सबसे अजीब चीज़ है इन नागपुर के संतरों के साथ वो ये की इन्हे उगाने के लिए सिर्फ आँसुओं की ज़रूरत होती है बाकि जगह के फल उगाने में जितनी मेहनत करनी पड़ती है उतनी मेहनत इनमे नहीं लगती बस आंसू बहाओ और काम हो गया
नागपुर के संतरो की उत्पादकता में इस तरह की वृद्धि हमारी फलों की चयन इच्छा के लिए एक बड़ा खतरा है! आप सबसे अनुरोध है की कुछ समय के लिए यानि जबतक ये नागपुर के संतरों की खेती खत्म नहीं हो जाती अपने-अपने व्यक्तिगत फलों के स्वाद को छोड़कर एकजुट होकर इसको खत्म करने की दिशा में काम करें!

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