क्या यह लड़ाई जारी रहेगी ? – कँवल भारती

19388551_1702147313159569_8267236386531042142_o

दलित वर्ग में एक लम्बे समय से Direct Action की लड़ाई बंद हो गयी थी. डा. आंबेडकर के बाद कांशीराम ने इसे दुबारा शुरू किया था, पर उन्होंने ही आरएसएस से हाथ मिलाकर उस लड़ाई पर ठंडा पानी डाल दिया था. उनकी उत्तराधिकारी मायावती ने भी उस लड़ाई को ठंडा ही रखा. पर सहारनपुर की घटना ने जिस तरह पूरी इंसानियत को झकझोरा है, जिसे व्यथित होकर तमाम प्रगतिशील लोगों और संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है, उसी तरह दलित वर्ग में भी उसने भयानक रोष पैदा किया है, जो स्वाभाविक है. इसके गर्भ से Direct Action की लड़ाई ने फिर जन्म ले लिया है. और मायावती ने फिर इस पर पानी डाल दिया है. उन्होंने यह बयान देकर कि भीम आर्मी और चन्द्रशेखर से उनका कोई संबंध नहीं है, भाजपा और आरएसएस को खुश कर दिया है. इस बयान ने भाजपा को दलितों की Direct Action की लड़ाई को कुचलने के लिए हरी झंडी दिखा दी. सो, भाजपा का इशारा मिलते ही उसकी वफादार पुलिस ने चन्द्रशेखर आज़ाद को सहारनपुर कांड का मास्टरमाइंड बताकर जेल में ठूस दिया. पुलिस भी जानती है कि चन्द्रशेखर का उस घटना में कोई हाथ नहीं था, पर SSP को यही करना था, क्योंकि उसे यही आदेश थे. यह चन्द्रशेखर की राजनीतिक नासमझी थी कि वह SSP के बुलाने से शब्बीरपुर गया, और उसके खतरनाक जाल में फंस गया. उसकी यह भी नासमझी थी कि उसने समर्पण नहीं किया, और भूमिगत हो गया, हालांकि उसे ठीक से भूमिगत होना भी नहीं आया, और अपनी महिला दोस्तों के संपर्क में बना रहा. उन्हीं में से एक महिला दोस्त के सहारे पुलिस डलहौजी में उस तक पहुँच गयी. लेकिन, मायावती इतनी नासमझ कैसे हो गयीं कि दलित अत्याचार की इतनी सनसनीखेज घटना ने भी उनके दिल को नहीं दहलाया. उन्होंने इतने महत्वपूर्ण मुद्दे को भी राजनीति का विषय इसलिए नहीं बनाया, क्योंकि राज्यसभा में जाने के लिए उनके पास बहुमत नहीं है, और उन्हें बहुमत चाहिए, जो कहीं से भी मिल जाए ! ऐसी दलित-विरोधी और मनुष्यता-विरोधी राजनीति पर लानत ही भेजी जा सकती है.
अभी भी समय है, उन्हें इस मुद्दे को जोरशोर से उठाना चाहिए. जिस तरह JNU मामले में कन्हैया कुमार को मास्टरमाइंड बताकर जेल में डाला गया, तमाम बेकसूर मुस्लिमों को आतंकी घटनाओं का मास्टरमाइंड बताकर जेलों में सड़ाया गया, जो बाद में कोर्ट से बरी हुए, उसी तरह चन्द्रशेखर को भी मास्टरमाइंड बनाकर जेल में डाला गया है. मास्टरमाइंड बनाने का यही खेल छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार आदिवासियों के साथ सालों से खेल रही है, वहाँ कल्लूरी जैसे पुलिस अफसर ने न जाने कितने आदिवासियों को नक्सली बताकर यातनाएं दी हैं, बलात्कार कराए हैं, और मौत के घाट उतारा है. मायावती के लिए यह बहुत सुनहरी अवसर था, इस लड़ाई को लड़ने का. पर वह अपने गुरु कांशीराम के बताए रास्ते पर चल रही हैं, जो स्वार्थ और सत्ता की राजनीति का रास्ता है.
यह हैरान कर देने वाली बात है कि राजनीतिक क्षितिज पर सहारनपुर घटना का कुछ भी असर दिखाई नहीं पड़ रहा है. समाजवादी पार्टी से तो चलो कुछ भी उम्मीद इसलिए नहीं की जा सकती कि अखिलेश सरकार पूरे पांच साल एंटी जाटव रही थी. पर कांग्रेस को क्या हुआ? उत्तरप्रदेश में उसकी सबसे कमजोर स्थिति होने के बावजूद भी वह दलितों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के सवालों पर इसलिए ज्यादा मुखर नहीं हो रही है, क्योंकि उसे यह डर कि इससे उसका अपर कास्ट हिन्दू वोट नाराज हो जाएगा, जो पहले ही भाजपा के साथ जा चुका है.
सुना है कि चन्द्रशेखर की लड़ाई का झंडा अब उनकी माँ ने उठा लिया है. और करो या मरो का जज्बा रखने वाले नौजवान उनके साथ हैं. Direct Action की यह लड़ाई अगर जारी रहती है, तो इसका मतलब यह है कि राज्य आतंकवाद का भी उनको सामना करना होगा, जो उनके विरुद्ध अभी और तेज हो सकता है. लेकिन इस लड़ाई में उन्हें उन तमाम लोगों और संगठनों को शामिल करना होगा, जो हिन्दू राष्ट्रवाद के खिलाफ लोकतंत्र के लिए लड़ना चाहते हैं.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s